सोलह श्रृंगार आर ओकर विशेषता

December 5th, 2017 by

सोलह श्रृंगार आर ओकर विशेषता

१. सिथ्थी (मांग टीका )

सिथ्थी पति द्वारा प्रदान कएल गेल सेनुरक रक्षक होईत छैक. ललाट पर लटकैत एकर अंतिम छोर दुनु भौहक बीच तक पहुंचैत अछि, जाहिठाम पुरूष सेनुरक टिका लगबैत छथि तैं एकर नाम मांग टिका पड़ल अछि.

२. टिकुली (बिंदिया) –

आकर्षण में टिकुलीक अपन अलगे महत्व छैक. एकरा अहि तरहें लगाओल जाईत छै कि सिथ्थीक एकटा छोर एकरा स्पर्श क’अ सकय मुदा पूर्ण रूप सँ झाँपाय नै. टिकुली दुनु भौंहक बीचों-बीच लगाओल जाइतै छैक, ओ स्थान आज्ञाचक्र कहाइछ। आज्ञाचक्र अर्थात जतय ईस्वरीय ऊर्जा के रूप में हमरा सबहक संचित संस्कार केन्द्रीत होईत अछि।

३. काजर (काजल) –

स्त्री केर आंखिक उपमा माछ आ हिरणी सँ देल जाइत छैक। बेसी काल स्त्री मीनाक्षी होईत छथि वा मृगनयनी. सृष्टिक ई दुनु जीव बड्ड चंचल होईत छैक. हिनकर चंचलता के किनको नजैर लागि जाय त नजैरक अभिशाप आंखि सँ होइत हृदय में उतैर जाईत छै. काजर एहेन अशुभ नजैर सँ बचाव करैत छै.तैं काजर लगाएब प्रत्येक स्त्री के लेल बेहद शुभ मानल जाईत छैक. ई नजैर के कुप्रभाव सँ रक्षा करिते अछि संगहि सुंदरता में सेहो चारि चांद लगा दैत छैक.

४. नथिया (नथुनी) –

नाक में धारण कएल जाय वाला ई आभूषण अपन अपन परंपरा आ रिवाज में छोट-पैघ होईत छै. ई रक्त संचार के ग्रीवा भाग में स्थित करबैत अछि ताहि लेल कील वा नथिया के रूप में जीवन पर्यन्त ई आभूषण धारण करब एकटा सुहागन स्त्री के लेल अति आवश्यक मानल जाइत अछि.

५. सेनुर (सिंदूर )-

भारतीय वेदांगक अनुसार शरीर में माथक हिस्सा सूर्यक होईत छै आ सूर्य आत्मा केर कारक थिकै तैं अहि श्रृंगारक माध्यम सँ प्रथम बेर कोनो पुरूष कोनो स्त्री के अपन संगिनी बनबैत छथि . ताकि जीवन में एकर निरन्तरता आर स्थायित्व बनल रहय। विवाहक मुहूर्त बड्ड सोचि विचारि के निर्धारित कएल जाइत छैक. सिंदूरक बिना कोनो श्रृंगार अधूरे मानल जाईत छैक. मात्र एक चुटकी सिंदूर सँ दू गोटा जन्मक संगी बैन जाइत छथि

६. मंगल सूत्र –

कांध आ माथक बीच के भाग में नाना प्रकारक नस सँ घेराओल रहैत छैक आर गरदनि में पड़य वाला हार ओहि सब नसक गति के व्यवस्थित करैत अछि. ताहि लेल ई भारतीय परंपरा छै कि स्त्री के कहियो गरदनि सुन नै रखबाक चाही. तकरा लेल सबसँ आदर्श मंगलसूत्र मानल जाइत अछि. जे कि एकटा ऐहन ताग ( धागा) होईत छैक जकरा पहिरलाक पश्चात प्रत्येक चीज मंगलमय होईत छैक. ई सुहागक सूचक सेहो होईत अछि.

७. कानक बाली (कर्णफूल ) –

कानक नस स्त्री के नाभि सँ ल’अ पएरक तरवा तक महत्वपूर्ण भूमिका केर निर्वाह करैत अछि.जाहि सँ हुनक सहिष्णुता निर्धारित होईत अछि. कीछ विशेषज्ञ सबहक कहब छैन्ह कि कान आर नाक में छिद्र नै भेला पर स्त्री के लेल प्रसव पीड़ा सहन करब अत्यंत कठिन भ’अ जाइतै छैक.

८. मेंहदी –

विशेष अवसर पर लगाओल जाय वाली मेंहदी हार्मोन के त प्रभावित करिते टा अछि आ रक्त संचार के सेहो नियंत्रण में रखैत छै. ई दिमाग के शांत आ तेज बनबैत अछि. मान्यता एहनो अछि कि जिनकर मेहंदी जतेक गाढ़ रंग अनैत अछि, हुनका ओतबहि अपन पति आर ससुरालक सिनेहक प्राप्ति होइत छैन.

९. चूड़ी-कंगन –

यदि चूड़ी मन केर चंचलता के दर्शाबैत अछि त कंगन मातृत्वक ललक उत्पन्न करैत छै. तैं कंगन विवाहिताक श्रृंगार थिकै आ चूंड़ी कुमाईर कन्या सेहो पहिरैत छथि.

१०. गजरा –
केश के थकैर ओकरा बाद गजरा लगयबाक बड्ड सुन्नर कारण छै। फूलक सुंगध मोन के तरोताजा आ ठंढा रखैत छै. भले ही आई काल्हि महिला फैशन परस्त भ’अ केश के फोइल के राखैत होथि मुदा फुजल केश अपशकुन मानल जाईत छैक.

११बाजूबंद –

किछ इतिहासकार सब बाजूबंद के मुगलकालक देन मानैत छथि मुदा पौराणिक कथा सब में एकर खूब चर्चा अछि. ई अधिक उम्र में मांसपेशी में खिंचाव आ हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत छैक. ई एखनहु सर्वाधिक दक्षिण भारत में उपयोग कएल जाइत अछि।

१२. औंठी (अंगूठी)-

ई दाहिना हाथक अनामिका आँगुर में पहिरल जाइत छैक. अहि में लागल सीसा में विवाहिता जखन चाहय अपन सूरत निहारि सकैत छथि. अहिसँ हुनका मन में अपन पतिक छवि बनल रहैत छैन.

१३. डरकस (कमरबंद) –

कमरबंद काज में उत्साह आर शरीर में स्फूर्तिक संचार बना के राखैत अछि. उत्तम स्वास्थ्यक लेल कमरबंद स्वास्थ्य कारक सँ आवश्यक आर उत्तम मानल जाईत छैक.ई अवस्था बढ़ला पर मांशपेसी में खेंचाव आर हड्डी में दर्द के नियंत्रित करैत अछि.

१४. पायल –

स्त्री अपना घरक गृहलक्ष्मी होईत छथि. हुनक संचारण आर सुभागमन बहुत शुभ मानल जाईत छैक. पायल मूल रूप सँ चानी के होईत छै. चानी चंद्रमाक धातु थिकै, चंद्रमा शरीर में मन केर कारक होईत छैक. पायल में बजैत घुंघरू मन के भटकय सँ रोकैत छै.

१५. बिछिया –

पएरक अंतिम आभूषण के रूप में बिछिया पहिरल जाईत छैक. दुनु पएरक बीच के तीनटा आँगुर में बिछिया पहिरबाक रिवाज छै. वास्तव में सब श्रृंगार बिछिया आर टीका के बीच होइत छै. सोना के टीका आर चांनी के बिछियाक भाव ई होईत छैक कि आत्म कारक सूर्य आर मन के कारक चंद्रमा दुनु के कृपा जीवनपर्यन्त निरन्तर बनल रहय. बिछिया एक्यूप्रेशर के सेहो काज करैत अछि।.जाहिसँ तरवा सँ नाभि तक के सभ नस आर पेशी व्यवस्थित रहैत छै.

१६.परिधान (कपड़ा) –

अंतिम और सबसँ महत्वपूर्ण श्रृंगार होईत अछि परिधान. शारीरिक आकार प्रकारक अनुसार परिधान में रंगक चयन स्त्री के तंत्रिका तंत्र के मजगूतत आ व्यवस्थित करैत अछि. तैं परिधान चयन में पसंद ना पसंदक विचार जरूर हेबाक चाही.

वस्तुत: श्रृंगार का मतलब केलव सजावट नै होईत छैक ई सोच, कर्म, भावना, विचार कें सेहो प्रभावित करैत अछि. चूँकि जाधरि स्त्री अपनहि संतुलित नै रहती त ओ परिवार के केना खुशहाल रखती. तैं नारीक सजब-संवरब बड्ड आवश्यक होइत छैक।

© नीरज मिश्र मुन्नू
संस्कार मिथिला पेज

निर्वाचन सुरक्षा व्यस्था कडा बनाउन मानवअधिकार अायोगको माग

December 4th, 2017 by

१८ मंसिर, काठमाडौं । राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोगले निर्वाचन सुरक्षा व्यवस्था कडा बनाउन सरकारसँग माग गरेको छ ।

दोस्रो चरणको चुनाव नजिकिदै गर्दा देशका विभिन्न ठाउँमा उम्मेदवारहरुलाई नै लक्षित गरी बम विष्फोट भएको भन्दै आयोगले सुरक्षा व्यवस्था कडा बनाउन माग गरेको हो ।

आयोगले विज्ञप्ति प्रकाशति गरी यस्ता घटनाप्रति गम्भीर ध्यानाकर्षण भएको भन्दै भत्र्सना समेत गरेको छ ।

बम आक्रमणका घटनाहरूमा वृद्धि हुँदै जाँदा समेत वास्तविक दोषी पहिचान हुन नसक्नुले निर्वाचन सुरक्षामा गम्भीर चुनौति खडा भएको भन्दै आयोगले घटनाका दोषी पहिचान गरी कानुनी दायरामा ल्याउन र निर्दोष व्यक्तिलाई कुनैपनि आस्थाका आधारमा जथाभावी धरपकड नगर्न आग्रह गरेको छ ।

आयोगका सचिव वेद भट्टराईले प्रकाशित गरेको विज्ञप्तिमा राज्यका सबै सुरक्षा व्यवस्थालई प्रभावकारी तुल्याई निर्वाचनलाई स्वतन्त्र, निष्पक्ष र भयरहित रुपमा सम्पन्न हुने वातावरणको सुनिश्चितता गर्न माग गरिएको छ ।

माओवादीले सरकार नछाड्ने, समर्थन पनि फिर्ता नलिने

December 4th, 2017 by

२८ असोज, काठमाडौं । माओवादी केन्द्रले आफ्ना मन्त्रीहरु फिर्ता नबोलाउने भएको छ । सरकारलाई दिएको समर्थन पनि फिर्ता नलिने र सरकार पनि नछाड्ने रणनीति माओवादीले अघि सारेको छ ।

प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवालाई कमल थापा लगायत ८ जनालाई मन्त्री र राज्यमन्त्रीमा नियुक्त गरेपछि माओवादी पार्टी सरकारबाट बाहिरिने धेरैले अनुमान गरेका थिए ।

स्वयं प्रधानमन्त्री देउवा पनि आज वा भोलिसम्म माओवादी मन्त्रीहरुले राजीनामा दिने विश्वासमा रहेका छन् । तर, माओवादी भने देउवाको चाहना पूरा नगर्ने निर्णयमा पुगेको छ ।

माओवादी नेता नारायणकाजी श्रेष्ठले अनलाइनखबरसँग भने– ‘हामी तोकिएको समयमा चुनाव चाहन्छौं त्यसैले असिहले सरकारबाट फिर्ता हुँदैनौं र समर्थन पनि फिर्ता हुँदैन ।’

प्रधानमन्त्री देउवाले गरेको मन्त्रिपरिषद विस्तार आचार संहिता विपरीत एवं गलत कार्य भएको नेता श्रेष्ठले बताए । उनले भने–‘नयाँ मन्त्रीहरुको नियुक्ति आचार संहिता विपरीत छ । कामचलाऊ सरकारले यसरी मन्त्रिपरिषद विस्तार गर्न मिल्दैन ।’

आरजुको विपक्षमा उत्रिए पुराना कांग्रेस पुष्करनाथ

December 4th, 2017 by

१८ मंसिर, महेन्द्रनगर । सोमबार बिहान धनगढीस्थित घरमा पत्रकार सम्मेलन आयोजना गरेकी प्रधानमन्त्रीपत्नी तथा कैलाली–५ मा प्रतिनिधिसभा उम्मेदवार आरजु राणाले भनिन्, ‘जिते पनि हारे पनि केही छैन, यहाँको विकासमा जुट्नेछु ।’

स्थानीय सञ्चारकर्मीहरुका लागि उनको मुखबाट ‘हार’ शब्दको उच्चारण अप्रत्यासित थियो । उनी यसअघि उक्त शब्द उच्चारण गर्दिनथिन् ।

खासमा, करिब तीन दिनयता एकाएक आफ्नो माहोल बिग्रिएको स्वीकारोक्ति थियो त्यो । उनको उम्मेदवारीप्रति असन्तुष्ट रहँदै आएका पुराना कांग्रेस नेता पुष्करनाथ ओझाले खुलेरै आफ्नो विपक्षमा लागेको सूचना आरजुले पाएपछि उनमा चुनाव हारिने मनोविज्ञान पलाएको स्रोतको दाबी छ ।

त्यसो त, प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा पनि पाँच दिनदेखि धनगढीमै बास बसिरहेका छन् । र, साँझबिहान पत्नीको क्षेत्रका मतदाता र नेता/कार्यकर्तासँग भेटेर चुनाव जिताउन आग्रह गर्दै आएका छन् ।

तर, ओझाले भने राणालाई सहयोग गर्न नसकिने आफू निकटस्थहरुलाई बताउने गरेका छन् । भोलि आफूलाई मात्र नभई सबैलाई राजनीतिक रुपमा अप्ठ्यारो पर्ने भएकाले आरजुका पक्षमा नलाग्न ओझाले नेता/कार्यकर्तालाई मनाउने प्रयास गरिरहेका छन् । आफूसँग विश्वासमा नलिई गरिएको उम्मेदवारी चयनप्रति ओझा शुरुदेखि नै असन्तुष्ट छन् ।

स्थानीयवासीका अनुसार ओझाले आफ्नो पकेटको करिब ३५ सय मत प्रभावित पार्ने हैसियत राख्छन्, कैलाली–५ मा । उनको परिवारको मत नै एक हजारभन्दा माथि छ । डोटीबाट कैलाली झरेका ओझाहरुको मत हो त्यो र तीमध्ये अधिकांश कांग्रेस समर्थक हुन् ।

विवेकशील साझा पार्टीबाट सोही क्षेत्रमा उम्मेदवारी दिएका दिनेश भण्डारी पनि पूर्वकांग्रेस समर्थक हुन् । उनले काट्ने मतमध्ये अधिकांश कांग्रेसकै हो । भण्डारीको पुख्र्यौली थलो डोटीको गठेरा जोरायल क्षेत्रमा हो । कैलाली–५ मा उक्त क्षेत्रबाट आएर बसेका मानिसको ठूलो संख्या छ । हरेक चुनावमा ती मत निर्णायक हुने गर्छन् ।

विगतमा शेरबहादुर देउवा, ओझा र टेकबहादुर चोख्यालले निर्वाचन जित्ने आधार पनि तिनै मत थिए । विवेकशीलका भण्डारीले चार हजारभन्दा बढी मत ल्याए भने आरजुको जित असम्भवप्रायः बन्ने स्थानीय विश्लेषकहरु बताउँछन् ।

उनीहरुको बुझाइमा कांग्रेसभित्र किचलो चर्किंदा राना थारुको मत एमाले उम्मेदवार नारदमुनि रानातिर जाने जोखिम देखिएको छ । त्यसै पनि रानाले २० प्रतिशत आफ्नो समुदायको मत पाउने सम्भावनालाई कमजोर आँकलन गर्न सकिँदैन ।

त्यसबाहेकको मत कांग्रेसभित्रको किचलोले नै प्रभावित पार्ने जोखिम देखिएको देउवा परिवारसँग निकटस्थ एक कांग्रेस कार्यकर्ता बताउँछन् ।

‘जुन जुन मत आरजुका लागि निर्णायक बन्न सक्थे, तिनै मतमाथि प्रहार भएपछि केही भन्न सक्ने अवस्था रहेन,’ उनी भन्छन्, ‘तीन दिन अघिसम्म ओझाले आरजुलाई खुलेर समर्थन गर्ने आशामा थियौं तर त्यस्तो हुन सकेन ।’

स्थानीय होटेल विद्यामा कोठा लिएर ओझाले आफू निकटस्थ नेता/कार्यकर्तासँगको भेटघाट बाक्लो बनाएका छन् । उक्त होटेल पनि कांग्रेसका पूराना नेता आनन्द जोशीको घर हो । उनी पनि आरजुको उम्मेदवारीप्रति असन्तुष्ट छन् ।

कांग्रेस जिल्ला सचिव पूर्ण कुँवर पनि आरजुको विपक्षमा छन् । असन्तुष्ट पक्षले विवेकशीलका भण्डारीलाई मत दिने अनुमान गर्न थालेका छन्, स्थानीय नेता/कार्यकर्ता । सोमबार र मंगलबारमा देउवाले असन्तुष्ट पक्षलाई मिलाउने प्रयास नगरे आरजुको चुनावी माहोल जोखिममा पर्ने उनी निकटस्थहरुकै दाबी छ ।

यसअघि अनलाइनखबरसँगको अन्तर्वार्तामा आरजुले भनेकी थिइन्, ‘चुनाव हो, शतप्रतिशत जितिन्छ त कसरी भन्न सकिन्छ र ? आफ्नो तर्फबाट कोशिस गर्ने हो । कोशिस गरिरहेकी छु । हार्ड वर्क हो, हेरौं ।’

कांग्रेसको बलियो संगठन र आफ्नो हार्ड वर्कका कारण चुनाव जितिने आशा उनमा देखिन्थ्यो । तथापि, असन्तुष्ट पक्ष खुलेर आफ्नाविरुद्धमा लाग्ला भन्ने आकलनमा उनमा त्यतिबेला पाइँदैनथ्यो ।

अहिले बिग्रिएको माहोलबीच आरजुले चुनाव जिते पनि बढीमा आठ सय मतको अन्तर मात्र रहने दाबी उनी निकटस्थहरुकै छ ।

ओझालाई आरजुको विपक्षमा नलाग्न आग्रह गर्नेहरु पनि छन् । तर, उनले मानिरहेका छैनन् ।

त्यसो त, देउवाले ओझालाई भेटेर असन्तुष्टि व्यवस्थापनको प्रयास नगरेका पनि होइनन् । ओझाले भेट्न चाहेनन् । यसअघि दिनभर कैलाली–३ र ४ मा रामजनम चौधरी र सुनिलकुमार भण्डारीका पक्षमा प्रचार गर्ने र राति धनगढी पुगेर बास बस्ने गरिरहेका थिए ।

कैलाली–५ मा उनी आरजुका पक्षमा प्रचारमा निस्केका थिएनन् तर उनले जितेमा खुशी नै हुने बताउने गरेका थिए । कुनै कार्यकर्ताले आरजुले आफूलाई अवसरवादी भनेको बताउँदै कुरा लगाइदिएपछि ओझा आक्रोसित बनेर विपक्षमा ‘लबिङ’ थालेको स्रोतको दाबी छ ।

उम्मेदवारी दर्ताको समय नजिकिँदै गर्दा आरजुले बर्दिया या कैलाली–५ मा कहाँ लड्ने भन्ने अन्योल थियो । कैलाली–५ मा चुनाव लड्ने निर्णय गर्दै गर्दा उनी ओझालाई विश्वासमा लिन चुकिन् । र, अहिले जोखिममा परेकी छन् ।

ओझा ०३६ सालदेखि कांग्रेस राजनीतिमा छन् । र, पञ्चायती व्यवस्थाविरुद्धको आन्दोलनमा जेल पनि परेका थिए । स्थानीयस्तरमा लोकप्रिय नेता मानिन्छन्, उनी । ०७० सालको दोस्रो संविधानसभा निर्वाचनमा देउवा सोही क्षेत्रबाट निर्वाचित भएका थिए ।

उनले उक्त क्षेत्र छाडेर गृहजिल्ला डडेलधुरा रोजेपछि भएको उपनिर्वाचनमा ओझा विजयी भएका थिए । तर, त्यसपछि बनेका सरकारमा मन्त्री नबनाएकामा उनी देउवासँग रुष्ट रहँदै आएको देउवा निकटस्थ स्रोतको दाबी छ । मोबाइल स्वीच अफ रहेकाले ओझासँग सम्पर्क हुन सकेन ।

आरजु निकटस्थ एक स्रोतले भने ओझाजस्तो राजनीतिक उचाइ भएका नेताले पार्टी संस्थापनको निर्णयविरुद्ध अभियान सञ्चालन गर्न नसक्ने दाबी गर्‍यो । आफ्नो राजनीतिक जीवन नै दाउमा राखेर ओझाले आरजुलाई खुलेर असहयोग गर्न नसक्ने उक्त स्रोतको भनाइ छ ।

१६ मंसिरमा आरजुलाई हराउन आग्रह गर्दै धनगढीका चोक–चोकमा पर्चा टाँसिएको थियो । सोही समूहले ओझाले खुलेर आरजुको विपक्षमा अभियान थालेको भ्रामक प्रचार गरिरहेको उक्त स्रोतको दाबी छ ।

सोमबार बिहान धनगढी गाउँमा आयोजित चुनावी सभालाई सम्बोधन गर्दै आरजुले आफ्नो जित सुनिश्चित देखेर एक विपक्षी दल भ्रामक प्रचारमा लागेको बताएकी थिइन् । उनको लक्ष्य विवेकशील साझा पार्टीतर्फ थियो ।

जनक्रान्ति करे नई परे फेर स ककरो मरे नई परे

December 2nd, 2017 by

जनक्रान्ति करे नई परे
फेर स ककरो मरे नई परे
निक जेंका तू सोंच करिहा
निक जेंका तू भोट करिहा

शहिदक सोनित के रखिहा लाज
अई बेर करिहा ढंगक काज
आब कि देतो खसवादी लुच्चा
जे बनैयलको सब दिन बुच्चा

बाइस जिल्लाके आठ बनैयलको
राईते राइत संविधान बनैयलको
रोवैत मधेश , ऊ दिप जरैयलको
लास प चैढ, संविधान फुकैयलको

मुकेशक बात के याद तु रखिहा
मायक दुधके लाज तु रखिहा
भोट नई दिहअ खसवादीके
नाता पिहानी पार तु रखिहा
नीक जेंका सोच तु करिहा
नाक जेंका भोट तु करिहा

अप्पन धरती खून स रंगल
विनाकारण शहीद वो बनल
फेर आन्दोलन करे नई परे
फेर स ककरो मरे नई परे
नीक जेंका तु सोच करिहा
नीक जेंका तु भोट करिहा

२०७४/०५/३०
– मुकेश यादव ( विराटनगर)

टीकापुरमा महिला भर्सेस महिलाः पुरुषभन्दा नरम प्रतिस्पर्धा !

December 2nd, 2017 by

१६ मंसिर, टीकापुर (कैलाली) । शुक्रबार बिहानै स्थानीय महिला पतञ्जली योग समितिले टीकापुरमा होम आयोजना गरेको थियो । सबै पार्टीका प्रतिनिधि र प्रदेशसभा उम्मेदवार होममा आमन्त्रित थिए । र, त्यसैमा पर्थे दुई महिला पनि, जो कैलाली-१ बाट प्रतिनिधिसभाका प्रतिस्पर्धी बनेका छन् ।

उनीहरु हुन्-कांग्रेसकी पूर्वसांसद ईश्वरी न्यौपाने र वाम गठबन्धनका तर्फबाट एमाले केन्द्रीय सदस्य मदनकुमारी शाह, जसलाई गरिमा शाहका नामबाट पनि चिनिन्छ ।

न्यौपाने कांग्रेसकी केन्द्रीय सदस्य र पूर्वसचेतक हुन् । उनी कांग्रेसको केन्द्रीय राजनीतिमा प्रभावशाली मानिन्छिन् । शाह ०७० सालकी समानुपातिक सांसद हुन् । युवा संघ हुँदै एमाले राजनीतिमा प्रवेश गरेकी चिर परिचित युवा नेतृ हुन्, शाह ।

दुबै नेतृहरु ०७० सालको संविधान सभामा समानुपातिक सभासद् थिए ।

मुलुकभरका निर्वाचन क्षेत्रमा प्रतिस्पर्धी बनेका उम्मेदवारहरु एकअर्कालाई घोचपेच र कटाक्ष गर्न व्यस्त छन् । न्यौपाने र शाहको चुनाव प्रचार शैली अलि बेग्लै छ । दुवैले मतदातामाझ आफ्नो शान्त र भद्र स्वभाव प्रस्तुत गर्ने गरेका छन् । आपसी घोचपेचलाई टाढा राखेका छन् ।

जसले जिते पनि एक महिला संसदमा पुग्ने कुरालाई उनीहरुले मुख्य विषयवस्तु बनाएको पाइन्छ ।

महिला हुनुको शालीनता प्रस्तुत गरिरहँदा उनीहरुमध्ये कसले जित हात पार्लान् भन्ने आँकलन स्थानीय बासिन्दाले गर्न सकिरहेका छैनन् । पार्टीगत संगठनका हिसाबले पनि दुवै लाभमै देखिन्छन् ।

टीकापुर क्षेत्रबाट ०७० सालको निर्वाचनमा जनकराज चौधरीले जितेका थिए, लोकतान्त्रिक फोरमबाट । पार्टी एकतासँगै जनक पनि अहिले कांग्रेसमा पुगेका छन् । र, अहिले उनी कांग्रेसबाट कैलाली १ ‘क’मा प्रदेश सभाका उम्मेदवार बनेका छन् ।

कैलाली-१ मा स्थानीय निर्वाचनको मतमा लोकतान्त्रिक गठबन्धन अगाडि थियो । तथापि, थोरै मतले टीकापुर नगरपालिकाको मेयरमा एमालेका उम्मेदवार विजयी भएका थिए ।

यस क्षेत्रमा टीकापुर नगरपालिका तथा जोशीपुर र जानकी गाउँपालिका पर्छन् ।

अहिले राप्रपाले पनि कांग्रेस उम्मेदवार न्यौपानेलाई समर्थन गरेको छ । तत्कालीन फोरम लोकतान्त्रिकको प्रभाव क्षेत्र भएकाले त्यो लाभ पनि कांग्रेस नेतृ न्यौपानेलाई देखिन्छ ।

एमाले नेतृ शाहसँग माओवादीको संगठन पनि जोडिएको छ । सोही कारण उनको ‘पोजिसन’ पनि कमजोर देखिँदैन । खासगरी, थारु समुदायमा माओवादीको पकड राम्रो मानिन्छ ।

भूमिगतको डर

ईश्वरी र गरिमा दुबैलाई ७ भदौ ०७२ मा टीकापुरमा भएको नरसंहारका मुख्य योजनाकार भएको आरोप लागेपछि भूमिगत बनेका रेशमलाल चौधरीले पनि उम्मेदवारी दिएर दिएका छन् । उनी राजपामार्फत् प्रतिनिधिसभाका उम्मेदवार बनेका हुन् । उनको पक्षमा थारु समुदायको मत पर्याप्त खस्यो भने त्यसको जोखिममा दुवै नेतृ देखिन्छन् ।

कांग्रेस उम्मेदवार ईश्वरी न्यौपाने भन्छिन्, ‘रेशमले भ्रम छर्ने कोशिस गरिरहेका छन्, आफूले जितेमा जेलमा भएका कैदीहरुलाई छुटाउने भ्रम सिर्जना गरिरहेका छन् ।’

पक्राउ पर्ने डरले भारतमा बसिरहेकाहरुलाई पनि स्वदेश फर्काउने र जेल परेका २२ जनालाई छुटाउने एजेन्डा रेशमले बनाएका छन् । रेशमले भिडियो रेकर्ड गरेर बस्तीमा पठाउने र प्रोजेक्टरमार्फत् मतदातालाई देखाउने गरिरहेका छन् ।

‘टीकापुरमा जे घटना भएको थियो, त्यसमा नुनचुक नछर्किऔं,’ न्यौपाने भन्छिन्, ‘त्यस घटनामा नेपालीकै धनजनको क्षति भएको छ । र, त्यसलाई नेपाल र नेपालीको आँखाबाटै हेर्नुपर्छ ।’

यो क्षेत्रमा ६० प्रतिशतभन्दा बढी थारु मतदाता छन् । ४० प्रतिशतभन्दा कम पहाडी मतदाता छन् । थारु समुदायको मत नलिई कसैले पनि जित्न सक्ने भने देखिँदैन

घटनालगत्तै भारततिर भाग्ने, सरकारले दिएको एक करोड ७४ लाख क्षतिपूर्ति पनि लिने अनि जनताका लागि काम गर्छु भन्दा कसैले नपत्याउने न्यौपानेको मत छ ।

रेशमका पिता लालवीर चौधरी एमालेबाट प्रदेशसभा ‘क’तर्फ उम्मेदवार बनेका छन् । उनको प्रतिस्पर्धा कांग्रेसका जनक चौधरीसँग छ ।

‘केही दलहरुले त्यो घटनासँग एमालेलाई प्रत्यक्ष मुछ्ने गरेको पाइन्छ,’ एमाले उम्मेदवार शाह भन्छिन्, ‘जेलमा रहेका २२ जनालाई छुट्न नदिने एमाले नै भएको भ्रम पारिएको छ, हामीले चिर्नुपर्ने यी दुई विषय हुन् ।’

गरिमाको बुझाइमा जातीय विद्वेषको विपक्षमा रहेको वर्ग सानो छ । र, साम्प्रदायिक भावना फैलाउने वर्ग पनि सानै छ । ‘तर, दोस्रो वर्गले ठूलो संख्यामा रहेको फराकिलो जनमानसलाई भ्रममा पार्ने प्रयास गरिरहेको छ,’ शाह भन्छिन्, ‘त्यो वर्गलाई जसले वास्तविकता बुझाउन सक्छ, पल्ला भारी उसैको हुन्छ ।’

वनगाउँ उत्तरपूर्वका बडघर जितबहादुर चौधरीको बुझाइमा राजपा उम्मेदवार रेशमले राम्रै भोट पाउने सम्भावना देखिएको छ । ‘भित्री समर्थन भएजस्तो लाग्छ, जित्ने सम्भावना नै त देखिँदैन,’ उनी भन्छन्, ‘तर, यो निर्वाचनमा जातीय नभई पार्टीगत राजनीति नै हुने सम्भावना बढी देखिन्छ ।’

निर्णायक थारु र सेन्टिमेन्टल मतदाता

यो क्षेत्रमा ६० प्रतिशतभन्दा बढी थारु मतदाता छन् । ४० प्रतिशतभन्दा कम पहाडी मतदाता छन् । थारु समुदायको मत नलिई कसैले पनि जित्न सक्ने भने देखिँदैन ।

सबै दलहरु थारु समुदायमा आफ्ना एजेन्डा लागु गराउने प्रयासमा देखिन्छन् । र, उक्त समुदायलाई रिझाउन लागिपरेका छन् ।

टीकापुरमा थारु र पहाडी समुदाय दुई फ्याक्टर हुन् । पूर्व र पश्चिमको फ्याक्टर पनि छ यहाँ । पहाडका सातवटा जिल्लाबाट झरेका मानिसले आफूलाई खाँट्टी सुदूरपश्चिमेली मान्छन् । कर्णालीबाट यता आएका मानिसले आफूलाई अलग्गै ठान्छन् ।

प्युठानीहरुको संख्या पनि बढी छ यहाँ, जसले आफूलाई अलग्गै समूह ठान्छन् ।

एमाले उम्मेदवार शाह बाजुराकी छोरी र अछामकी भाञ्जी हुन् । टीकापुर क्षेत्रमा अछामबाट झरेको जनसंख्या धेरै छ । त्यताको मत शाहलाई जाने सम्भावना देखिन्छ ।

कर्णाली नदीभन्दा पूर्वबाट आएको जनसंख्याको मत कांग्रेसकी न्यौपानेलाई जाने सम्भावना छ ।

शाहका चुनावी एजेन्डा युवालाई आकर्षित गर्न खेलकुद विकास हो । आर्थिक समृद्धि, टीकापुर क्षेत्रमा स्तरीय अस्पताल, कनेक्टिभिटीलगायत उनका एजेन्डा छन् ।

कांग्रेसकी न्यौपानेले पनि आर्थिक विकास र समृद्धिकै एजेन्डा अगाडि सारेकी छन् ।

अछाम सेन्टिमेन्टका मतदाताले प्रदेशसभा ‘ख’मा कांग्रेसका रणबहादुर रावललाई मत दिने सम्भावना बलियो छ । प्रदेशसभा ‘क’मा थारु बाहुल्य क्षेत्र भएकाले कांग्रेसका जनक चौधरीको पल्ला भारी देखिन्छ ।

अछाम सेन्टिमेन्टको मत एमालेकी शाहलाई खस्ने सम्भावनाका कारण न्यौपाने कमजोर रहेको आकलन पनि छ स्थानीय स्तरमा । तर, उनी र रावल दुवै पार्टीमा समस्या नरहेकाले मत बाँडिने सम्भावना नरहेको बताउँछन् ।

कांग्रेसले लोकतान्त्रिक फोरमसँग एकता गरेकाले राम्रो भोट पाउँछ । एमाले र माओवादी पनि बलिया शक्ति हुन् । त्यसैले कडा प्रतिस्पर्धा हुने सम्भावना देखिन्छ ।

उक्त पार्टीबाट आएका अधिकांश नेता, कार्यकर्ता र मतदाता पहिले कांग्रेस नै थिए । त्यसैले पार्टी एकीकरण हुँदाको लाभ पनि देखिन्छ, न्यौपानेलाई ।

तथापि, थारु मतदाताको मत राजपातिर गयो भने न्यौपानेको अवस्था जोखिमपूर्ण देखिन्छ । त्यस्तो हुन नदिन कांग्रेस कार्यकर्ताले रेशमले जित्दा केही उपलब्धि हासिल नहुने र जेलमा रहेकाहरु नछुट्ने बताउँदै थारु मतदाताको विश्वास जित्ने प्रयास गरिरहेको पाइन्छ ।

प्राध्यापक कीर्तिसिंह बम कैलाली-१ मा कडा प्रतिस्पर्धा रहेको ठान्छन् । संविधान कार्यान्वयन र समृद्धि हासिल गर्ने मुद्दामा कांग्रेस र लोकतान्त्रिक गठबन्धनबीच प्रतिस्पर्धा रहेको उनी बताउँछन् ।

सन्तुलन मिलाएर उम्मेदवारी दिएकाले कांग्रेसको अवस्था राम्रो रहेको बमको ठम्याइ छ । उक्त पार्टीले समानुपातिकबाट उमादेवी वादीलाई पनि उम्मेदवार बनाएको छ ।

एमाले उम्मेदवार शाह पनि कमजोर उम्मेदवार नभएको प्राध्यापक बम बताउँछन् । संघीय समाजवादी फोरमबाट भगतराम चौधरी प्रतिनिधिसभाका उम्मेदवार बनेका छन् । उनले पनि सेन्टिमेन्टल मत काट्ने सम्भावना रहेको बमको विश्लेषण छ ।

शिक्षक शम्भुराज भट्टराई भने वाम गठबन्धनको अवस्था बलियो देख्छन् । तर, झिनो मतान्तरले जितहार हुने उनी बताउँछन् ।

वाम गठबन्धनको विरोध गर्दै गर्दा लोकतान्त्रिक गठबन्धनलाई असर पुगिरहेको उनी बताउँछन् । तर, कांग्रेस र एमालेमा मत क्रस गर्न उक्साउने तिनै पार्टीका कार्यकर्ता देखिएको उनको विश्लेषण छ ।

टीकापुर बजारमा कांग्रेसलाई पहिलो पार्टी मानिन्छ । त्यसपछि एमालेको स्थान आउँछ ।

थारु सेन्टिमेन्टको मत राजपातिर गयो भने वाम गठबन्धन संकटमा पर्ने उनी बताउँछन् । ‘तर, गाउँमा घर-घरमा सक्कली छाता राखिएको हेर्दा कांग्रेसको मत पनि प्रभावित बन्ने जोखिम देखिन्छ,’ उनी भन्छन् ।

अनिल मिश्रा के अभिनय मे एकटा और नव सीरियल

December 2nd, 2017 by
मैथिली फिल्म सस्ता जिनगी महज सेनुर आ सेनुरक लाज एहेन पारिवारिक फिल्म के निर्माता बालकृष्ण झा एकटा नव मैथिली धारावाहिक ‘स्वर्ग ने बिनु मुईने’ लय क आबि रहल छथि। अहि धारावाहिक के प्रसारण 2 अकटूबर सं हरेक रविदिन साँझ के 6 बजे डीडी बिहार चैनल पर कायल जायत।
अहि धारावाहिक के मुख्य अभिनेता अनिल मिश्र कहै छथि कि, क्या मार सकेगी मौत उसे, औरों के लिए जो जीता है.. मिलता है जहां का प्यार उसे, औरों के जो आँसू पीता है। मैथिली धारावाहिक ‘स्वर्ग ने बिनु मुईने’ में अहि पंक्ति के जीवंत करैत एकटा नव रंग मे अहाँ सभक समक्ष आबि रहल छी। अनिल कहै छथि जे, बालकृष्ण झा अहि धारावाहिक के लेल हम्मर छुङाव केलनि आ हम अपना दिस सं भरपूर कोशिश कय रहल छी जे, बालकृष्ण झा’क संग-संग अहूँ सबहक उम्मीद पर खड़ा उतरी।